बहुत नामों से तुम मुझे बुलाओगे
कई नाम मैं भी दूँगी तौफे मैं तुम्हें
पर सुनो, 'सोना' मत कहना मुझे!
त्रिवेणी (Triveni) is a form of poetry introduced by Gulzar. My first attempt in the genre. You can read about it here.
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Tuesday, October 25, 2011
Friday, October 07, 2011
'गुब्बार'
दोस्त का लिबास पहन के आया था वो
इसलिए अपना 'गुब्बार' छिपा ना सकी
कल पता चला की अपने दोस्त की पैरवी करने आया था
खुशनसीब है कुछ लोग की उनके दोस्त बहुत अच्छे हैं
इसलिए अपना 'गुब्बार' छिपा ना सकी
कल पता चला की अपने दोस्त की पैरवी करने आया था
खुशनसीब है कुछ लोग की उनके दोस्त बहुत अच्छे हैं
Monday, June 07, 2010
कुछ पंक्तियाँ
जो तुम्हारी अहमियत राहे-ज़िन्दगी में महसूस होती
इजहारे दिल करने की गुस्ताखी ना की होती
गुरूर तुम्हें हो ना कहीं अपने ही होने का
गुज़री शामें जों, वो तुम्हारी जुस्तजू नहीं
मेरे दिल की लगी थीं...****
मैं अपनी दो बादामी आखों में समां रही हूँ तूफ़ान
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